KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Tuesday, September 27, 2011
मन अनुरागी करे अभी- जो चाहे कल
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मन अनुरागी करे अभी - जो चाहे कल हिम हेम हवा अंबर शंबर शिशिर तिमिर प्राणद को ठगने द्विज जुटे -भीड़ ज्यों रचा स्वयम्वर कमल-नयन नग श्...
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Friday, September 23, 2011
अश्क नैन ले -मोती रही बचाती
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आइये थोडा हट के कुछ देखें २६ और ३२ रुपये में दिन भर खाना खा लें बच्चों को पढ़ा लें संसार चला लें प्यार कर लें हनीमून भी मना लें ………कैसा है ये...
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Wednesday, September 7, 2011
तेरी विन्दिया जो दमकी (भ्रमर-गीत)
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कहीं विकिलीक्स का खुलासा तो कहीं आतंकियों की दहशत त्रस्त है आज जनता , कब कौन बाजार से या कचहरी से लौट के आये या न आये भगवन ही जानता है …ऐसे ...
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