KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Sunday, September 30, 2012
उँगलियों के इशारे नचाने लगी
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उँगलियों के इशारे नचाने लगी उम्र की सीढ़ियों कुछ कदम ही बढे अंग -प्रत्यंग शीशे झलकने लगे वो खुमारी चढ़ी मद भरे जाम से नै...
Sunday, September 23, 2012
कल चला था पुनः राह में मै उसी दिल में यादों का तूफाँ समेटे हुए …
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——————————————— ( फोटो साभार गूगल / नेट से लिया गया ) कल चला था पुनः राह में मै उसी दिल में यादों का तूफाँ समेटे हुए … रौशनी छन...
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Monday, August 13, 2012
एक कवि बीबी से अकड़ा
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एक कवि जब खिन्न हुआ तो बीबी से वो अकड़ा कमर कसा बीबी ने भी शुरू हुआ था झगडा कितनी मेहनत मै करता हूँ करूँ कमाई सुनूं बॉस की र...
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