KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
Pages
(Move to ...)
Home
▼
Thursday, June 5, 2014
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
›
जिया जरे दिन रात हे पीऊ तड़प के रात बिताऊं ( photo with thanks from google/ne...
Friday, May 30, 2014
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो...
›
(photo with thanks form google/net) जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे और तुम ….. मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो... ------------------...
Saturday, May 17, 2014
कौन हो तुम प्रेयसी ?
›
कौन हो तुम प्रेयसी ? कौन हो तुम प्रेयसी ? कल्पना, ख़ुशी या गम सोचता हूँ मुस्काता हूँ, हँसता हूँ, गाता हूँ , गुनगुनाता हू...
‹
›
Home
View web version