KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Sunday, August 24, 2014
हे री ! चंचल
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हे री ! चंचल हे री ! चंचल ---------------- (photo with thanks from google/net) जुल्फ है कारे मोती झरते रतनारे मृगनयनी न...
Thursday, June 5, 2014
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
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जिया जरे दिन रात हे पीऊ तड़प के रात बिताऊं ( photo with thanks from google/ne...
Friday, May 30, 2014
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो...
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(photo with thanks form google/net) जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे और तुम ….. मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो... ------------------...
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