KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Saturday, November 15, 2014
बेवफा
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बेवफा ( खेल समझकर दिल क्यों तोड़ जाते हैं वे ) घर फूटा मन टूटा बिच्छिन्न हुए अरमान मैंने पाया विश्वास गया ठेस लगी टूटा ...
1 comment:
Sunday, August 24, 2014
हे री ! चंचल
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हे री ! चंचल हे री ! चंचल ---------------- (photo with thanks from google/net) जुल्फ है कारे मोती झरते रतनारे मृगनयनी न...
Thursday, June 5, 2014
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
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जिया जरे दिन रात हे पीऊ तड़प के रात बिताऊं ( photo with thanks from google/ne...
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