KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Sunday, April 18, 2021
साजन का मुख तो दिखला दे
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*************** कितना ठौर ठिकाना बदले हे चंदा तू नित आकाश साजन का मुख तो दिखला दे चैन से सो लूं जी इस रात ******************* सुरेन्द्र कुमा...
Wednesday, April 14, 2021
प्रिय उर तपन बढ़ा री बदली
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***************** प्रिय उर तपन बढ़ा री बदली देखें तुझको दसियों बार चांद देख लें अपनी ' पगली ' आ मिल लें सावन इस बार । **************...
Sunday, April 11, 2021
धड़कनें दिल की समझती
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छुआ जब से मुझको तूने खिल गई हूं कली से मै फूल बनकर भ्रमर आते ढेर सारे छुप रही हूं ना सताएं शूल बनकर गुनगुनाते छेड़ते कितने तराने यह खुश बहुत...
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