Saturday, April 2, 2011
Check out आज ‘तिरंगा’ फिर लहराया- विजयी ‘विश्व’ है ‘भारत’ छाया « Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'
Wednesday, March 30, 2011
दिया तो तुमने जला दिया है- अब "दीवाली" लाना
दिया तो तुमने जला दिया है- अब "दीवाली" लाना
जियो खिलाडी -एक- पटखनी देकर
भईया जता दिया है
दिया तो तुमने जला दिया है-
अब "दीवाली" लाना
( photo with thanks from other source for a good cause)
खुशियों से भर -माँ का दिल
‘उछल’-‘नाच’ कर आना
लिए हाथ में -वही-"विश्व-कप"
‘सन तिरासी’ हमें यद् है
तुम भी -जोश-जगाना !!!
गले मिलो तुम -'तेज' करो -कुछ
पैना अब 'हथियार'
बड़ा 'तेज' है ‘दुश्मन’ तेरा
देख चुका 'संसार' !!!
यहाँ से "लंका" तक का
सफ़र कठिन था
गजब-जमाया ‘यार’
धोनी धुन दो -सबको लेकर
सचिन करो -कुछ- गुन देकर
आस हमें है -सौ- के सौ की
यही "सुनहरी" अवसर भाई
सोच अभी ले -प्लान अभी कर
नींद न आये तुम्हे अंत तक
डटे रहो मैदान !!!!!
समय नहीं है खेलो जमकर
रोज मान ले -आज "वर्ल्ड -कप"
सहवाग लगा देना तुम -"आग"
कोहली युवी बनो गंभीर
ले मुनाफ -'रैना' जहीर
नेहरा नेह न टूटे भाई
हर को लेकर 'भजन' करो
एकाग्र चित्त -कुछ-जतन करो
मेरी "वाणी" की 'पति' रखना
हमने "माँ" को वचन दिया है
लिए "विश्व-कप फोटो चलो खिंचायें"
यारा-जैसे भी हो सच कर आयें
गाँव -गली-घर-शहर-हहर कर
सब को गले मिलाएं
इसी बहाने
दुनिया जाने
"भारत" अपना
क्या है "सपना-
सच कर आना"
"वंशी" फिर से बजाना
दूध-मलाई-छाछ -दही सब
'गुड'-मीठा आ खाना
"छवि' -"एक"- संग ले ही आना
"माँ" को रोज दिखाना
लिए खड़े हैं "हार" यहाँ हम
आकर जल्दी गले पहन !!!!!!
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रम्र५
प्रतापगढ़ उ.प्र.
अब हम जीत के आयेंगे >>>>>आओ 'होली' जल्दी आओ -जियरा जरा जुड़ाई-
आओ 'होली' जल्दी आओ -जियरा जरा जुड़ाई-
होली आई मेरे भाई बन - ठन के
रंगीली जैसे नारि हो .....
पिया के स्वागत तत्पर बैठी
छप्पन भोग बनाये
गुल - गुलाल हर फूल बटोरे
छन - छन सेज संवारे
घूंघट उठा उठा के ताके
घर आँगन क्षन-क्षन में भागे
हवा बसंती -कोंपल-हरियाली
तन में आग लगाये
खिले हुए हर फूल वो सारे
मुस्काएं -बहुत - चिढ़ाएं
कोयल भी अब कूक-कूक कर
"कारी" - करती जाये
सुबह 'बंडेरी' - 'कागा' बोले
'नथुनी' हिल-हिल जाये
होंठों को फिर फिर चूमि -चूमि के
दिल में आग लगाये
कहे सजन चल पड़े तिहारे
जागे- गोरी 'भाग' रे
आँगन तुलसी खिल-खिल जाये
हरियाली 'पोर' - 'पोर' में छाये
रंग - बिरंगी तितली जैसी
भौंरो को ललचाये
रंग गुलाल से डर-डर मनवा
छुई -मुई हो जाये
पवन सरीखी - पुरवाई सी
गोरी उड़ -उड़ जाये
चूड़ी छनक -छनक 'रंगीली'-
होली याद दिलाये
सराबोर कब मनवा होगा
मोर सरीखा नाचे
पपीहा -पिया -पिया तडपाये
बदरा उडि -उडि गए "कारगिल"
"काश्मीर"-"लद्दाख"
गोरिया विरहा -"रैना" मारी
भटके कोई सागर तीरे
कोई कन्या - कुमारी
बंडवा - नल -'सुख' -'सोख' ले रहा
फूल रहा -कुम्हिलाई
आओ 'होली' जल्दी आओ
कान्हा को लई आओ
सावन के बदरा से बरसो
जियरा जरा जुडाई
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
३०.३.२०११ प्रतापगढ़ उ.प्र .
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