Thursday, June 5, 2014

जिया जरे दिन रात हे पीऊ

जिया जरे दिन रात हे पीऊ
तड़प के रात बिताऊं
                                                         ( photo with thanks from google/net)
----------------------------------
भोर उठूँ जब सेजिया खाली
गहरी सांस ले मन समझाऊँ
दुल्हन जब कमरे से झाँकू
पल-पल नैन मिलाती
अब हर आहट बाहर धाती
'शून्य' ताक बस नैन भिगोती
फफक -फफक मै रो पड़ती पिय !
फिर जी को समझाती
जी की शक्ति आधी होती
दुर्बल काया कैसे दिवस बिताऊं ?
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
तड़प के रात बिताऊं
========================
वदन जले गर्मी दिन उस पर
भीगी जाऊं कितनी बार नहाऊँ
पुरवैया भी जिया जलाती
पछुआ सी हर अंग भिगोती
कब अंगना कब बाहर जाऊं
घूम-झाँक फिर मन मसोस घर आऊँ
नैन मिले ना कान्हा तेरा
बावरा मनवा कैसे मन समझाऊँ
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
तड़प के रात बिताऊं
======================
कोयल स्वर भी कर्कश लागे
पपीहा पीऊ पीऊ चिल्लाये
बाग़ गली कुंजन बौरों की
सुषमा मन ना भाये
ना श्रृंगार ना बनना -ठनना
बौराई मै इत-उत धाऊँ
नैन की चितवन छेड़-छाड़ सब
मुझे कचोटेँ कुछ भी भूल ना पाऊँ
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
तड़प के रात बिताऊं
====================
सास -ससुर की सेवा करती
कभी रसोई साफ़ -सफाई
दिन भर मन भरमाऊँ
खालीपन खाता मेरे मन को
सोच-सोच हे ! पल-पल सिहरी जाऊं
दीपक -बाती जिया जरायें
सेज -सुहाग तो अति तड़पाये
कुम्हलाये अब फूल अरे दिल !
बन बहार हरियाली आ जा
सावन आये -अब तो ना रह पाऊँ
जिया जरे दिन रात हे पीऊ
तड़प के रात बिताऊं
======================
मौलिक व अप्रकाशित" 
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर ५ '
कुल्लू हिमाचल
भारत
४.५०-५.१८ पूर्वाह्न
३०.५.२०१४



please be united and contribute for society ....Bhramar5

Friday, May 30, 2014

मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो...


(photo with thanks form google/net)

जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे
और तुम …..
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो...
-------------------------
केशुओं से झांकते तेरे नैन दोनों
प्याले मदिरा के उफनते लग रहे
काया-कंचन ज्यों कमलदल फिसलन भरे
नैन-अमृत-मद ये तेरा छक पियें
बदहवाशी मूक दर्शक मै खड़ा
तुम इशारों से ठिठोली कर रही हो
जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे
और तुम ..
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो
इस सरोवर में कमल से खेलती
चूमती चिकने दलों ज्यों हंसिनी
नीर झर-झर तेरे लव से यों झरें
चूम कर मोती बनाऊं मन करे
मै हूँ चातक तू है चंदा दूर क्यों
छटपटाता चांदनी से मन जले
जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे
और तुम ..
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो
इस सरोवर में झुकी जब खेल खेले लहर से
देख सब कुछ कांपते अधरों से सारे ये कमल
तू कमलिनी राज सुंदरता करे दिखता यहां
तार वीणा ....मेरा मन झंकृत करे
होश में आऊँ तो गाऊँ प्रेम-धुन मै री सखी
काश नजरें हों इनायत इस नजर से आ मिलें
जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे
और तुम ..
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो
भोर की स्वर्णिम किरण तू स्वर्ण सी
है सुनहली सर की आभा स्वर्ग सी
देव-मानव सब को प्यारी अप्सरा सी
नृत्य छन-छन पग के घुँघरू जब करें
मन मयूरा नाचता विह्वल सा ये
मोरनी सी तू थिरकती क्यों फिरे
जुल्फ हैं लहराते तेरे बदली जैसे
और तुम ..
मुस्कुराती दामिनी सी छल रही हो
.

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर '५
कुल्लू हिमाचल २४.५.२०१४
५.४५-६.१० पूर्वाह्न


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं




please be united and contribute for society ....Bhramar5

Saturday, May 17, 2014

कौन हो तुम प्रेयसी ?

कौन हो तुम प्रेयसी ?

कौन  हो  तुम  प्रेयसी ?
कल्पना, ख़ुशी या गम
सोचता हूँ मुस्काता हूँ,
हँसता हूँ, गाता हूँ ,
गुनगुनाता हूँ
मन के 'पर' लग जाते हैं
घुंघराली  जुल्फें
चाँद सा चेहरा
कंटीले कजरारे नैन
झील सी आँखों के प्रहरी-
देवदार, सुगन्धित काया  
मेनका-कामिनी,
गज गामिनी
मयूरी सावन की घटा
सुनहरी छटा
इंद्रधनुष , कंचन काया
चित चोर ?
अप्सरा , बदली, बिजली
गर्जना, वर्जना
या कुछ और ?
निशा का गहन अन्धकार
या स्वर्णिम भोर ?
कमल के पत्तों पर ओस
आंसू, ख्वाबों की परी सी ..
छूने जाऊं तो
सब बिखर  जाता है
मृग तृष्णा सा !
वेदना विरह भीगी पलकें
चातक की चन्दा
ज्वार- भाटा
स्वाति नक्षत्र
मुंह खोले सीपी सा
मोती की आस
तन्हाई पास
उलझ जाता हूँ -भंवर में
भवसागर में
पतवार पाने को !
जिंदगी की प्यास
मजबूर किये रहती है
जीने को ...
पीने को ..हलाहल
मृग -मरीचिका सा
भरमाया फिरता हूँ
दिन में तारे नजर आते हैं
बदहवाश अधखुली आँखें
बंद जुबान -निढाल -
सो जाता हूँ -खो जाता हूँ
दादी की परी कथाओं में
गुल-गुलशन-बहार में
खिलती कलियाँ लहराते फूल
दिल मोह लेते हैं
उस 'फूल' में
मेरा मन रम जाता है
छूने  बढ़ता हूँ
और सपना टूट जाता है
--------------------------------

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
७-७.२० मध्याह्न
२३.०२.२०१४
करतारपुर , जालंधर , पंजाब





please be united and contribute for society ....Bhramar5