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Wednesday, March 2, 2011
दुस्साहस -"घंटी" बजा देने का
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दुस्साहस -" घंटी" बजा देने का खुदाई जारी थी हम खुश थे - कुछ मिलेगा कोई सभ्यता फिर "सिन्धु - घाटी...
1 comment:
"बदनामी -सुनामी " का रूप ले ..surendra,shuklabhramar5-Kavita-Hindi poems
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"बदनामी -सुनामी " का रूप ले .. बड़े -बड़े -बोट-शिकारे-नाव जहाज-भीड़ -जुटती होड़ थी उन तक - जा पहुचने की उनके दरबार में -अपना भी ना...
Saturday, February 19, 2011
" निमंत्रण"
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" निमंत्रण" अरबों साल का है ये तारा पृथ्वी - गोल - चपटा ब्रह्माण्ड , सूरज से कितने सूरज हैं किसने ,...
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