KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Wednesday, April 20, 2011
गुप-चुप-गुप-चुप रजनी आई !!!
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गुप-चुप-गुप-चुप रजनी आई !!! पहला मिलन अनोखा ऐसा कली से जब में फूल बनी नैनो का वो आमंत्रण कितने आये और गए होठों की मुस्कान ख...
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Tuesday, April 19, 2011
हे साजन जब तुम ना आते
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शाम को मेरा दिया जलाना (photo with thanks from other source ) अंधियारे को रोशन करना लगता सब बेकार !! कुछ -पल-को अँधियारा कर मै नजर बंद...
2 comments:
Monday, April 18, 2011
पंखुड़ियाँ छू छू उड़ जाते
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पंखुड़ियाँ छू छू उड़ जाते भौंरे जब तुम उड़ उड़ जाते किसी कली या खिले फूल पर गुन-गुन कर के जवां बनाते उसके कानो...
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