KAVITA, LEKH, RAS-RANG,
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Friday, March 25, 2022
विरहिन
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बगिया में कोयल कूके मन ना भाए मोरे साजन न आए लाल लाल फूल खिले जिया को जलाए बदरंग होली अगुन लगाए सूख गई बाली बाली तपन बढ़ी उर सजना से ही हरिय...
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Thursday, August 19, 2021
खो गए प्रेम के गीत
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मै रोज तकूं उस पार हे प्रियतम कहां गए छोड़ हमारा हाथ अरे तुम सात समुंदर पार नैन में चलते हैं चलचित्र छोड़ याराना प्यारे मित्र न जाने कहां गए...
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Sunday, April 18, 2021
साजन का मुख तो दिखला दे
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*************** कितना ठौर ठिकाना बदले हे चंदा तू नित आकाश साजन का मुख तो दिखला दे चैन से सो लूं जी इस रात ******************* सुरेन्द्र कुमा...
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