होंठ रसीले लरज रहे हैं
चाँद सा मुखड़ा सूर्यमयी
है
घूँघट कब ये खोले ?
नैन जादुई झील से गहरे
जीव जगत सब तरते
ढाई आखर प्रेम ग्रन्थ में
गहराई सब डूबे
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Bhramar5
५.१२-५.२२ पूर्वाह्न
६.४.२०१२ कुल्लू यच पी
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