Sunday, August 14, 2011

लिए तिरंगा मै निकला हूँ



हीरा हैं हम सोना हैं हम 
चांदी सा हम चमकेंगे !
सोने की चिड़िया, 
दूध की नदिया ,
"हरित-क्रांति" दिखलायेंगे !!
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गाओ बच्चों मेरे संग में !
मिल जाओ सब मेरे दल में !!
घर-घर से आवाज उठी है 
बन्दे मातरम -बन्दे मातरम !
लिए तिरंगा मै निकला हूँ 

कदम ताल कर -छम्मक छम !
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गाँव गली हर शहर नगर में 
रंग बिरंगा उत्सव है !
गीत शहीदों की गाते सब 
शीश झुका नतमस्तक हैं !!
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न्याय अहिंसाभाईचारा ,
प्रेम सभी दिल में भर दें !
दुश्मन कहीं जो आँख दिखाए 
धूल-धूसरित पल में कर दें !!
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सिंह से गरजें चोटी  चढ़ के 
कर अपनी चौड़ी छाती !
जल थल नभ की अपनी सेना 
दुनिया में गरजे जाती !!
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राखी बाँधे  जोश दिए हैं 
सब वीर अमर अपने भाई !
जन-गण मन अधिनायक जय हे 
गीत -सांस-अपनी थाती !!
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अग्नि- पृथ्वी- ब्रह्म-अस्त्र सब 
अब सब अपनी मुट्ठी में !
सोने सा तप के हम निकले 
मातृ-भूमि की भट्ठी से !!
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रहे न कोई क्षेत्र अधूरा !
कर पायें हम जो ना पूरा !!

माँ-भारती है गुरु हमारी !
बलि जाए हम प्राण पियारी !!
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अनुशासन में पल के बढ़ के 
नम्र शिष्ट हम बन जाएँ !
मातृ-भूमि की रक्षा में डट 
न्योछावर हम हो जाएँ !!
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हमारे सभी मित्र गन और सम्माननीय नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभ-कामनाएं -जय भारत जय हिंद .

ये कविता हमारे ब्लॉग बाल झरोखा सत्यम की दुनिया से उद्धृत 
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल "भ्रमर"५
प्रतापगढ़ उ.प्र. ३.१२ पूर्वाह्न 
१५.०८.२०११ 

Saturday, August 13, 2011

मोरा सैयां बड़ा नादान हो



मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई आधी रतिया बिताई के
बारह मास परदेश बितावे 
सावन  - भादों पहचान हो 
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

घरहूँ आये घूमी खेलि बितावे
बाल मन -२ कईसन  होए जवान हो
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

जाम भरे नैनन मै दिन भर निहारूं 
छैला आवे तो -२ रस छलकाई हो  
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

रात रानी सेजिया चमेली सजाऊँ
महकि  गमकि -२ कुम्हिलाई हो
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

पाऊडर क्रीम सब सेंट लगाऊं
हँसे बतियों में -२ बस उलझाई के
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

सोलह श्रृंगार सखी भौंरे को छेड़ूँ
पास आवे तो -२ अंचरा लुकाई हो
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

लौंगा इलायची मधुर बीरा लगाऊं
चाबे ना -२ निंदिया भुलाई हो
आधी रतिया बिताई के 
मोरा सैयां बड़ा नादान हो
आवई सारी रतिया बिताई के !!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
14.08.2011
जल पी बी  ८.३५ पूर्वाह्न  

तेरी रक्षा का प्रण बहना रग-रग में राखी दौडाई


बहना मेरी दूर पड़ा मै
दिल के तू है पास
अभी बोल देगी तू “भैया”
सदा लगी है आस
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मुन्नी -गुडिया प्यारी मेरी
तू है मेरा खिलौना
मै मुन्ना-पप्पू-बबलू हूँ
बिन तेरे मेरा क्या होना !
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तू ही मेरी सखी सहेली
कितना खेल खिलाया
कभी -कभी मेरी नाक पकड़ के
तूने बहुत चिढाया !
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थाली में तू अपना हिस्सा
चोरी से था डाल खिलाया
जान से प्यारी मेरी बहना
भैया का गहना है बहना !!
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जब एकाकी मै होता हूँ
सजी थाल तेरी वो दिखती
Rakhi-festival-images
चन्दन जभी लगाती थी तू
पूजा- मेरी आरती- करती !
रक्षा -बंधन और मिठाई
दस-दस पकवान पकाती थी
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बाँध दिया बंधन से तूने
ये अटूट रक्षा जो करता
मेरी बहना सदा निडर हो
ख़ुशी रहे दिल हर पल कहता
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जहाँ रहे तू जिस बगिया में
हरी-भरी हो फूल खिले हों
ऐसे ही ये प्यारा बंधन
सब मन में हो -गले लगे हों
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तू गंगा गोदावरी सीता
तू पवित्र मेरी पावन गीता
तेरी राखी आई पाया
चूम इसे मै गले लगाया
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कितने दृश्य उभर आये रे
आँख बंद कर हूँ मै बैठा
जैसे तू है बांधे राखी
मन -सपने-उड़ता मै “पाखी”
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तेरी रक्षा का प्रण बहना
रग-रग में राखी दौडाई
और नहीं लिख पाऊँ बहना
आँख छलक मेरी भर आई
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
१३.०८.११ ८.४५ पूर्वाह्न
जल पी बी