BHRAMAR KI MADHURI KAARAN AUR NIVARAN

Wednesday, February 9, 2011

दर्द- भ्रमर का हिंदी कविता

आने की सुन अपने भाई,
माँ कितना खुश होती,
जब उल्टा हम पैदा होते,
माँ कितना है रोती .
बेटा जब अख़बार में आया,
ख़ुशी बाप ने गले लगाया,
आगे पढता करतूतें जब ,
कैद जेल तो कितना रोया 1 


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