BHRAMAR KI MADHURI KAARAN AUR NIVARAN

Wednesday, March 2, 2011

"बदनामी -सुनामी " का रूप ले ..surendra,shuklabhramar5-Kavita-Hindi poems

"बदनामी -सुनामी " का रूप ले ..
बड़े -बड़े -बोट-शिकारे-नाव
जहाज-भीड़ -जुटती
होड़ थी उन तक -
जा पहुचने की
उनके दरबार में -अपना भी नाम-
लिखा आने की
आज न सही -  कभी
दुःख -दर्द में -अँधेरे में
काम आयेंगे
जिनका है बड़ा "नाम"-
बड़ा "काम"!!!
'उन' तक पहुचना
गंगा में जौ बोने सा था -
भूगर्भ में -
गुप्त रहस्य !!!
निरंतर -  टकराव
हमारे मन सा -
परतों के पन्नो को -
घिसते -कमजोर कर देते हैं
ला देते - झंझावत -  कम्पन
विस्फोट-
ज्वालामुखी !!
सुनामी >>>><<<
और फिर
एक बदनामी -"सुनामी" का
रूप ले -डुबा देती है -  नावें
कितनों की -  अपनों की
प्यारे दुलारों की
भोले लोगों की -
जो की 'नेक' थे
आते थे मिलने कि
कल मेरा 'अपना' -   'सपना'
गाँव का -  दुःख दर्द
हर लेगा -
'हर' लिया  उसने
एक दिन - साम्राज्य बना - बनाया
छिपा -छिपाया -डूब गया
और उजागर हो गया
गुप्त -रहस्य
नोटों कि गड्डियां
कुछ "फूले" -लोग -
चेहरा छिपाए- उलटे तैरते 
नजर आये !!!
मन की भंड़ास
कुछ कहने की
अन्दर दफ़न किये 
एक 'गुप्त -रहस्य' में
शामिल हो गए 
और "वो" फूल 
गुमसुम - बेजान 
उन पर चढ़ने को
तरसता रह गया
इन लहरों से दूर
तट पर -  एक हाशिये पर !!
शुक्लाभ्रमर५
२.३.११ जल पी.बी.

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